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पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग, दुर्ग
वर्तमान ग्राम पंचायते |
कुल जनपद पंचायते |
कुल नगर पंचायते |
नगर पालिका परिषद |
नगर निगम |
अनुभाग |
998 |
12 |
13 |
6 |
2 |
6 |
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विभाग का पदनाम: दिनांक 15 फरवरी 1987 में उप संचालक पंचायत एवं समाज सेवा रखा गया। इसके पूर्व पंचायत सेवा अधिकारी के नाम से जाना जाता था।
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विभाग के कार्यक्रम: दिनांक 28 जून 1999 से जिला कार्यालय पंचायत एवं समाज कल्याण दुर्ग रखा गया।
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विभाग के कार्यक्रम: खेलकूद एवं युवक कल्याण: वर्तमान में इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा किया जाता है। पोषण आहार एवं बाल कल्याण स्वतंत्र विभाग है।
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पंचायत की सचिवीय व्यवस्था: पंचायतों में सचिवीय कार्य हेतु अंशकालीन सचिव नियुक्त थे। अब यह कार्य सहायक ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा होता है। वर्तमान व्यवस्था में ग्राम पंचायत स्वयं अधिकार सम्पन्न है। जिन्हें पंचायत कर्मी नियुक्त करने का अधिकार प्राप्त है।
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समाज कल्याण की गतिविधियां: वर्तमान में इस हेतु पृथक विभाग प्रौढ़ शिक्षा बनाया गया है। ग्राम सेविका व महिला समाज शिक्षा संगठिका पहले ब्लाक में तथा महिला बाल विकास के अन्तर्गत भेजे जाते है।
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किशोर कल्याण: जिले में 19 फरवरी 1997 से पुन: सम्प्रेक्षण गृह का संचालन प्रारंभ किये गये जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के अपराधी प्रकरण से संबंधित किशोरों के सुधारात्मक प्रयास किये जाते है।
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सर्वेक्षण: जिले में विकलांगता के आधार पर चुनौती कार्यक्रम प्रारंभ किये गये। 2 अक्टूबर 1997 से प्रदेश व्यापी विकलांग सर्वेक्षण कराये गये। जिसमें 51435 नि:शक्त व्यक्ति पाये गये।
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निशक्तजनों का परामर्श केन्द्र: नि:शक्तजनों को शासन द्वारा किये जा रहे, सुविधाओं की योजनावार जानकारी देने के लिये एकल खिड़की व्यवस्था के लिये केन्द्र शुभारंभ दिनांक 08 जुलाई 2000 को किया गया।
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जिले में अनुदान प्राप्त संस्थाये: ‘’लायंस चेरिटबल ट्रस्ट‘’ सुपेला भिलाई , जिला दुर्ग: संस्था द्वारा मूक बधिर बच्चें के लिये के.जी-1 से 10 वीं कक्षा तक स्कूल संचालित किया जा रहा है। संस्था की स्थापना 04.04.1974 से हुआ है।
विवरण |
2003-04 |
2004-05 |
2005-06 |
अध्ययनरत् बच्चे
अनुदान राशि (लाख में) |
156
482013 |
160
482029 |
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430086 |
- स्वामी विवेकानंद कुष्ठ मुक्त आश्रम, खुर्सीपार भिलाई: स्वामी विवेकानंद कुष्ठ मुक्त आश्रम 2 अक्टूबर 1965 से कुष्ठ पीड़ित तथा कुष्ठ मुक्त व्यक्तियों को प्रशिक्षण देने एवं पुर्नवास के लिये कार्यरत है।
विवरण |
2003-04 |
2004-05 |
2005-06 |
अनुदान राशि (लाख में) |
3.96 |
7.92 |
4.30 |
- स्नेह सम्पदा विद्यालय 32 बंगला चौक सेक्टर-8 भिलाई: मानसिक रूप से अविकसित बच्चों का स्कूल नवम्बर 1992 से संचालित है। यहॉं विकलांग बच्चों के शिक्षण के प्रशिक्षण एवं पुर्नवास की व्यवस्था की जाती है।
- ब्राईट शिक्षण एवं मानव कल्याण समिति बरईपारा, दुर्ग: इस संस्था द्वारा मानसिक एवं श्रवण विकलांग बच्चों का नि:शुल्क शिक्षण एवं प्रशिक्षण विद्यालय, जवाहर नगर दुर्ग में वर्ष 1999 से दिया जा रहा है।
विवरण |
2003-04 |
2004-05 |
2005-06 |
लाभान्वित नि:शक्तजनो की संख्या अनुदान राशि (लाख में) |
88
171440 |
80
252840 |
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301604 |
- त्रिविधा विकास समिति ‘’मुस्कान‘’ 128 सिविक सेन्टर, भिलाई: यह संस्था 21 सितम्बर, 2004 से मानसिक विकलांग विद्यालय एवं पुर्नवास संचालन विकलांग बच्चों के लिए सेक्टर-02 भिलाई में संचालित है।
- जिले में मान्यता प्राप्त संस्था: जिला के लिए साक्षरता समिति , उतई रोड, दुर्ग जैन युवा मंच गवली पारा, दुर्ग, छत्तीसगढ़ सोशल फोरम क्वार्टर नं. 12- एफ सड़क-04 भिलाई, जिला दुर्ग आदर्श सत्संग समाज, ग्राम मटका, वि.ख. बेमेतरा, जिला दुर्ग एवं डिस्एबल्ड वेल्फेयर सोसायटी तमेर पारा, दुर्ग।
- बेरोजगार महिला सेवा समिति जोन 3 खुर्सीपार भिलाई , जिला दुर्ग भिलाई महिला मण्डल कार्यालय गुरूरद्वारा भवन सेक्टर-6 भिलाई जिला दुर्ग, सहयोगी मित्र मण्डल ग्राम थनौद वि.ख. एवं जिला दुर्ग, गायत्री प्रज्ञा पीठ, शिव आश्रम पुलगांव चौक, दुर्ग, सोसायटी फॉर सर्विसेज, मौर्या टाकीज के सामने, इथिराज टावर, जी.ई.रोड भिलाई जिला दुर्ग ‘’ संकल्प ‘’ केंसर केयर संस्था 47, नेहरु नगर ईस्ट, भिलाई जिला दुर्ग संत कबीर सत्संग प्रचार समिति ग्राम- बोहरा वि.ख. एवं जिला दुर्ग, मेडिकल ट्रेनिंग आर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया, राधिका नगर, भिलाई, मानवता लॉयस मनोविकास अनुसंधान एवं पुर्नवास केन्द्र हाउसिंग बोर्ड कालोनी न्यू.बोरसी, दुर्ग।
- प्रदेश स्तर पर विशेष उपलब्धि यह है कि राज्य स्तरीय पंचायत पुरस्कार योजना वर्ष 1995-96 में प्रदेश के 45 जिलों में से जिला पंचायत,दुर्ग को श्रेष्ठ जिला पंचायत घोषित किया गया एवं पुरस्कार के रूप में 50 लाख के पुरस्कार से सम्मानित होनेका गौरव मिला। उक्त पुरस्कार राशि से जिला मुख्यालय में जिला पंचायत बहुउद्देशीय भवन के रूप में भव्य भवन का र्निमाण किया गया। यह जिला पंचायत के स्वयं की सम्पति के रूप में विद्यमान है।
*(संदर्भ): 100 कदम शतायु दुर्ग: 1906-2006
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